Sunday, May 8, 2016

समन्वय की चेतना

समन्वय मानव चेतना का मूल विचार है । मानव ने जो कुछ उत्तम और श्रेष्ठ पाया है इसी के बल पर पाया है । क्योंकि दुनिया कभी भी एक रंग से नहीं रंगी जा सकती है , इतिहास प्रमाण है ...... जो भी विचार या समुदाय आए वो कई भागो मे विभाजित हो गए । इस लिए इन विचारो मे समन्वय आवश्य होना चाहिए तभी समाज सार्थक होगा अन्यथा एक विभंजकारी विनाशक व्यवस्था जन्म लेगी जिसका खाड़ी देश प्रत्यक्ष उदाहरण है । भारत वर्ष के महापुरुष बुद्ध ने तो इसको केंद्र मे रख पूरा एक संप्रदाय ही खड़ा कर दिया । बाद मे अंबेडकर और लोहिया इस समन्वयवाद के बड़े पक्षधर हुये । परंतु वर्तमान समय मे पूरा का पूरा एक सामाजिक वर्ग खड़ा हो गया है जो समन्वय की जगह संघर्ष पर ज्यादा बल दे रहा है इससे उसका जो भी हित सध जाये पर समाज का भारी अहित हो रहा है ।

Sunday, April 24, 2016

बदल रहा है हिंदुस्तान

#‎मैंगते_चंग्नेइजैंग_मैरी_कॉम‬ नाम ही काफी है पहचान के लिए ......हिंदुस्तान के किसी कोने मे चले जाइए ....और यह नाम पूछ लीजिये .....शायद ही कोई होगा जो कहेगा की ....वह मैरी कॉम को नहीं जानता । हिंदुस्तान की यह बेटी ....महिला मुक्केबाज़ी मे मुल्क का नाम एक बार नहीं पाँच बार रोशन किया ....और इस इलाके को लड़कियों के लिए खोल दिया ....मणिपुर के दुर्गम एवं दूरस्थ इलाके से निकल ,व्यवस्था से संघर्ष करते हुये .....यह मुकाम पाना ....बड़ी बात है ...आप प्रतीक है की व्यवस्था को कोशने की जगह उससे लड़ना चाहिए ....इसी मे हमारी और इस मुल्क की सार्थकता है ..और दुनिया इन्ही शूरवीरों को सलाम करती है ...आज आपके साथ एक तमगा और जुड़ गया ‪#‎सदस्य_राज्यसभा‬ ......मै मोदी सरकार के इस फैसले का स्वागत करता हूँ ....और उम्मीद करता हूँ की सरकार ....इसी तरह देश हित मे फैसले लेगी ......इसी तरह से यह मुल्क एक भारत श्रेष्ठ भारत मे परिवर्तित होगा ........मैरी कॉम आपके इस नए खेल मैदान मे स्वागत है ....और भविष्य के लिए शुभकामना 

Thursday, April 14, 2016

कहाँ जा रहे है .....हम ....

जब हम छोटे बच्चे हुआ करते थे तब हमारे अध्यापक हमे बताते थे की समाज मे बुराइयों का कारण अशिक्षा और गरीबी है । तब हम सोचा कराते थे की एक ऐसा दिन होगा जब हमारा देश पूरी तरह से ....भेदभाव मुक्त हो जाएगा .....क्योंकि वह दिन जरूर आएगा जब हमारा मुल्क पूरी तरह से शिक्षित हो जाएगा ....पर नहीं शायद मै गलत था । कारण बड़ा साफ है आजकल सोसल मीडिया पर इन पड़े लिखे लोगो को ....सामाजिक दुराव फैलाते देख कर साफ हो जाता है ...... 

Friday, May 22, 2015

तमाशा मेरे आगे

संस्कृति का भी अजब खेल है क्या जायजा है क्या नाजायज है यह समझना ........... कठिन है .......... मेरी कोशिस है की दुनिया बदले ...